हमारा नई वीडियो जो है मामा भांजा मंदिर बारसूर का मामा—भान्जा मंदिर। यह मंदिर कब बना और क्यो बनाया गया, इसकी आधिकारिक जानकारी देने के लिए यहां कोई बोर्ड नहीं है लेकिन, स्थानीय लोगों की मानें तो यह मंदिर सैकड़ों साल पुराना है। यही वजह है कि आर्किलॉजी सर्वे आॅफ इंडिया इस मंदिर की सुध ले रहा है।
मामा—भान्जा के नाम से फेमस इस प्राचीन मंदिर में भगवान शिव का परिवार स्थापित है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण दो शिल्पकारों ने मिलकर एक ही दिन में कर दिया था। ये शिल्पकार रिश्ते में मामा और भान्जा थे। इस वजह है कि इस मंदिर को मामा—भान्जा मंदिर कहा जाता है।

माना जाता है कि बारसूर में इसके अच्छे दिनों में लगभग 150 मंदिर थे। उनमें से एक 11वीं शताब्दी का चंद्रादित्य मंदिर है। यह माना जाता है कि इसका निर्माण सामंती सरदार चंद्रादित्य द्वारा करवाया गया था और उसके नाम पर ही इसका नाम पड़ा। यहां पर पाए गए बारसूर शैली की अनेक मूर्तियों में गर्भगृह के दरवाजे पर विष्णु और शिव की संयुक्त प्रतिमा हरी-हर की भव्य मूर्ति है। खंडित मूर्ति में से, महिषासुरमर्दिनी, जिसे स्थानीय रुप से दंतेश्वरी कहते हैं। जिनकी मूर्ति को अभी भी पहचाना जा सकता है। बलिदानों का चित्रण करती हुई मूर्तियां और मंदिर के कोनों में अलंकृत नंदी बैठे हुए हैं।

🙏🙏जय जोहर🙏🙏
🙏जय छत्तीसगढ़🙏
🙏🙏मया दुलार बनाये रखहु 🙏🙏
🙏🙏Thanks for Watching🙏🙏

👉👉👉मोर वीडियो के लिंक नीचे में दे हवे संगवारी हो👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇
https://youtu.be/aMsF5LOv0xY

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