
मैं बत्तीसा हूँ , मेरी उम्र 809 वर्ष है, 2005 मे मेरा पुनर्जन्म हुआ है. अब मैं साफ सुथरा रहता हूँ. मैं बस्तर मे अभी ईकलौता मन्दिर हूँ ज़िसमे दो गर्भगृह है. मेरे मंडप मे बत्तीस खंबे है इसलिये मुझे लोग बत्तीसा कहते है. बारसुर मे सबसे पहले मेरे ही दर्शन होते हैं.मेरे दोनो गर्भगृह मे स्वयं भोले बाबा विराजित है.
मुझे रानी गंगमहा देवी ने बनवाया था. मेरे खर्चे के लिये केरुमर्रका गांव दान मे दिया था. रानी ने इस मन्दिर मे बहुत बड़ी पूजा करवायी थी. उस समय सभी राज्य कर्मचारी और सारी प्रजा उपस्थित थी. रानी ने एक मन्दिर का नाम अपने पति एवं राजा सोमेश्वर के नाम पर सोमेश्वरा महादेव एवं दुसरे का नाम , स्वयं के नाम पर गंगाधरेश्वरा महादेव रखा था. BASTAR BHUSHAN
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