बारसूर के गनमन तराई का शिवमंदिर..........!
प्राचीन काल में बारसूर मंदिर और तालाबों की नगरी रही है। बारसूर चक्रकोट के नाग शासकों की राजधानी रही है। जनश्रूति है कि बारसूर में नाग राजाओं द्वारा 147 तालाब और 147 मंदिर बनवाये गये थे। आज भी यहां कई ऐतिहासिक तालाबों और मंदिर और उनके ध्वंशावशेष प्राप्त होते है।
मंदिर के साथ तालाब खुदवाना पूण्य का कार्य माना जाता है। इसी तरह बारसूर में भी मंदिरों के निर्माण के साथ साथ तालाब भी खुदवाये गये थे। बारसूर के गणेश मंदिर के पास ही एक पुराना तालाब है। इस तालाब को स्थानीय लोग गनमन तराई के नाम से जानते है।
गनमन तराई बारसूर का एक मात्र ऐसा तालाब है जिसके मध्य में हजार वर्ष पुराना मंदिर आज भी विद्यमान है। इस तालाब के मध्य में भगवान शिव को समर्पित शिव मंदिर ध्वस्त अवस्था में दर्शनीय है। संरक्षण के अभाव में यह मंदिर पूर्णतः ध्वस्त हो चुका है। इसका आधार और एक स्तंभ सुरक्षित है।
गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग आज भी उसी जगह पर स्थापित है। कैमरे को जूम करके मंदिर में स्थापित शिवलिंग को देखा जा सकता है। ग्रीष्मकाल में जब तालाब का पानी कम हो जाता है तब नाव के द्वारा या तैर कर यहां तक पहुंचा जा सकता है।
तालाब में नाव या किसी सुविधा के अभाव में मंदिर तक आम श्रद्धालु नहीं पहुंच पाते है जिसके कारण यह मंदिर जलीय पक्षियों का आरामगाह बन चुका है।
प्रश्न यह उठता है कि तालाब के अंदर मंदिर का निर्माण कैसे संभव हुआ होगा जिसका सीधा सा जवाब यही है कि पहले मंदिर को बनाया गया फिर उसके चारों तरफ तालाब खुदवा दिया गया।
इसी तरह कुटरू के पास एक ग्राम में भी तालाब के मध्य एक प्राचीन मंदिर अवस्थित था जिसके अवशेष आज भी देखने को मिलते है। इस मंदिर का आधार काफी उंचा और मजबूत है जिसके कारण सदियों से यह मंदिर आज भी अपना अस्तित्व बचा पाया है।
इस तालाब का सौंदर्यीकरण कर मंदिर तक पहुंचने के लिये नाव की व्यवस्था होनी चाहिये और साथ ही इस मंदिर का जीर्णोद्धार भी आवश्यक है नहीं तो इसके सारे पत्थर एक एक करके बिखरते चले जायेगे।
ओम....!
COPY - बस्तर भूषण

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