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बैताल रानी घाटी छत्तीसगढ़ का सबसे खतरनाक घाटी l baital rani ghati
बैताल रानी घाटी छत्तीसगढ़ का सबसे खतरनाक घाटी l baital rani ghati खैरागढ़. हसीन वादियों में बहुत से गहरे राज छिपे होते हैं. छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के छुईखदान ब्लॉक में ऐसी ही एक जगह हसीन वादियों से घिरी हुई है जिसका नाम बैताल रानी घाटी है.ऊँची-ऊँची पहाड़ियाँ, हरे-भरे घने जंगल के बीच बैताल रानी घाटी के खतरनाक मोड़ एवं गहरी खाईयां वाहनों को लील जाने के लिये हरदम तैयार रहती है. यह घाटी भय, रोमांच, आध्यात्म के साथ साथ मन को प्रफुल्लित करने वाले दृश्यो का भी सुखद अहसास कराती है. यही कारण है कि इन दिनों बड़ी संख्या में पर्यटक बैताल रानी घाटी की ओर आकर्षित हो रहे है. छत्तीसगढ़ की सबसे खूबसूरत और खतरनाक केशकाल, चिल्फी जैसी घाटियों में अब राजनांदगांव जिले में स्थित बैताल रानी घाटी का भी नाम शुमार हो गया है. बैताल रानी घाटी का इतिहास : धमधा के राजा ने इसी घाटी में अपनी रानी के कर दिये थे तीन टुकड़े ! इतिहास का अपना महत्व होता है. किसी भी स्थान के नाम के पीछे भी कोई कहानी या इतिहास जरूर होता है. इतिहास के कारण ही हम किसी भी प्राचीन घटना या किसी क्षेत्र विशेष के बारे ...
माँ सर्वमंगला देवी मंदिर संपूर्ण दर्शन |ड्रोन वीडियो| Maa Sarvamangala Mandir Korba By Harsh Verma
माँ सर्वमंगला देवी मंदिर कोरबा जिले के प्रसिद्ध मंदिर में से एक है। इस मंदिर की देवी दुर्गा है। यह मंदिर कोरेश के जमींदार में से एक राजेश्वर दयाल के पूर्वजों द्वारा बनाया गया था। मंदिर त्रिलोकिननाथ मंदिर, काली मंदिर और ज्योति कलाश भवन से घिरा हुआ है। वहाँ भी एक गुफा है, जो नदी के नीचे जाता है और दूसरी तरफ निकलता है। रानी धनराज कुंवर देवी को मंदिर में अपनी दैनिक यात्रा के लिए इस गुफा के लिए इस्तेमाल किया गया था। सर्वमंगला मंदिर का इतिहास वैसे तो 122 साल पुराना है। जिसकी स्थापना सन् 1898 के आस पास मानी जाती है। लेकिन इससे भी सालों पुरानी यहां एक और चीज है। वो है सूर्य देव के मनमोहक प्रतिमा के समीप स्थित वट वृक्ष, मंदिर के पुजारी अनिल पाण्डेय की मानें तो यह वट वृक्ष लगभग 500 वर्ष पुराना है। जैसा कि उनके पूर्वजों ने उन्हें बताया है। इस वृक्ष की सबसे बड़ी खासियत है कि इसे मानोकामना पूरा करने वाला वृक्ष माना जाता है। पूर्व में इस वृक्ष के नीचे हाथी भी आकर विश्राम किया करते थे। इसके बाद पिछले कुछ वर्षों तक विशाल वट वृक्ष के झूले जैसे तनों पर मयूर भी आकर विश्राम व क्रीडा करते ...
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