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जय जोहार संगवारी मैं हूं हर्ष आज आपके लिए लेकर आया हूं मैं नवरात्रि स्पेशल वीडियो जिसमें मैं नवरात्रि की पूरे 9 दिन अलग-अलग जगह का माता का दर्शन कराऊंगा अभी कोरोना काल की वजह से कई मंदिर बंद है जो कि 17 तारीख से बंद हो जाएगा तो दोस्तों 17 तारीख से हम आपके लिए बहुत सारे मंदिरों का वीडियो लाएंगे जिसमें माता का दर्शन कराएंगे दोस्तों इस वीडियो के जरिए आप घर बैठे हैं माता का दर्शन कर सकते हैं इस नवरात्रि आप घर में ही मना सकते हैं तो दोस्तों बने रहिये हमारे इस चैनल छत्तीसगढ़ में राइडर में और अपना प्यार और माया दुलार बनाते रहु मोर बर वीडियो के लिंक निचे में दे हवे https://youtu.be/kUQP0_Mx53Q #नवरात्रिस्पेशल #navratrispecialvideo #NavratriSpecial #officialtrailer #navratri2020 #navratri2020 #dongarhgarh #mahaisurmardani #chaiturgarh #nathaldai #marhimarabhanwartank #karelabhawanimata #patalbhairavi #khallarimata #budhimairaigarh #navrati #navratri2020 #बमलेश्वरीनीचेमंदिरडोंगरगढ़ #छोटीमांबम्लेश्वरीमंदिरडोंगरगढ़ #चंद्रहासिनीमाताचंद्रपुर #नाथलदाईमंदिररायगढ़ #मरहीमाताभनवारटंकपेंड्रामरवाही #महामायामंदिररतनपुर #खल्लारीमातामंदिरभीमखोजमहासमुंद #मातापातालभैरवीराजनांदगांव #करेलाभवानीमंदिरराजनांदगाँव #बंजारीमातामंदिररायगढ़ #बूढ़ीमाईमंदिररायगढ़ #महिषासुरमर्दिनीमाताचैतुरगढ़कोरबा #मांदंतेश्वरीमंदिरदंतेवाड़ा #माँमानकेशरीमंदिरजामगांवरायगढ़

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  जय जोहार संगवारी मैं हूं हर्ष  आज आपके लिए लेकर आया हूं मैं नवरात्रि स्पेशल वीडियो जिसमें मैं नवरात्रि की पूरे 9 दिन अलग-अलग जगह का माता का दर्शन कराऊंगा अभी कोरोना  काल की वजह से कई मंदिर बंद है जो कि 17 तारीख से बंद हो जाएगा तो दोस्तों 17 तारीख से हम आपके लिए बहुत सारे मंदिरों का वीडियो लाएंगे जिसमें माता का दर्शन कराएंगे दोस्तों इस वीडियो के जरिए आप घर बैठे हैं माता का दर्शन कर सकते हैं इस नवरात्रि आप घर में ही मना सकते हैं तो दोस्तों बने रहिये  हमारे इस चैनल छत्तीसगढ़ में राइडर में और अपना प्यार और माया दुलार बनाते रहु मोर बर वीडियो के लिंक निचे   में दे हवे https://youtu.be/kUQP0_Mx53Q  #नवरात्रिस्पेशल #navratrispecialvideo #NavratriSpecial #officialtrailer  #navratri2020 #navratri2020 #dongarhgarh #mahaisurmardani #chaiturgarh #nathaldai #marhimarabhanwartank #karelabhawanimata #patalbhairavi #khallarimata #budhimairaigarh #navrati #navratri2020  #बमलेश्वरीनीचेमंदिरडोंगरगढ़  #छोटीमांबम्लेश्वरीमंदिरडोंगरगढ़ #चंद्रहासिनीमाताचंद्रपु...

देखिये अमरकंटक का पुरे जगह का वीडियो हमारे यूट्यूब चैनल छत्तीसगढ़ राइडर में हर रोज एक वीडियो

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  देखिये अमरकंटक का पुरे जगह का वीडियो हमारे यूट्यूब चैनल छत्तीसगढ़ राइडर में  हर रोज एक वीडियो  चैनल का लिंक निचे दिया है  https://www.youtube.com/channel/UCuRkQ6iuZucAHFsYWZcLYdQ #माँनर्मदामंदिरअमरकंटक  #नर्मदाकुंड#माँनर्मदामंदिर  #अमरकंटक  #amarkantak #amarkantaktourism #amarkantaknarmadatemple #narmadatemple #narmadamata #narmadaudgamsthal #ORIGINATEPOINTOFNARMADARIVER   #amarkantak #AMARKANTAK #amarkantakdarshan #amarkantakghumnekajagah #amarkantaguid #amarkantaktourismplace #amarkantaktour #amarkantakmadhyapradesh #amarkantakanupur #amarkantakghumnekasahisamay #narmadaudgamsthal #narmadariver #narmadariveramarkanatak  #माँनर्मदामंदिर #नर्मदामंदिर #amarkantaklmaanarmadatemple #amarkantakdarshan #amarkantakdetails #amarkantakguid #originofnarmadariver #origino narmadariveramarkantak #amarkantak #india #madhyapradesh #trip #travelgram #heartofindia #adventurethatislife #jabalpur #livetotravel #mpstdc #pachmarhi #shiva #pachmarhidiaries...

Kankeshwar Mahadev Kani Korba (Drone Video) कनकेश्‍वर महादेव मंदिर || भोले भंडारी का एक अनोखा धाम ||

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  कनकेश्‍वर महादेव मंदिर: भोले भंडारी का एक अनोखा धाम छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में हसदेव नदी के तट पर कनकी नाम का एक छोटा सा गांव है. जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर कनकी का कनकेश्वर महादेव मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण स्थान है. छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में हसदेव नदी के तट पर कनकी नाम का एक छोटा सा गांव है. जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर कनकी का कनकेश्वर महादेव मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण स्थान है. इसे चक्रेश्वर महादेव मंदिर भी कहा जाता है. कनकी रायपुर से 197 किलोमीटर की दूरी पर कोरबा जिले में स्थित है. यहां के आचार्य मनोज शर्मा कहते हैं, ‘मान्यता है कि एक गाय रोज जाकर इस शिवलिंग पर दूध चढ़ाती थी. एक दिन गाय को ग्वाले ने ऐसा करते देख लिया. गुस्से में उसने जहां दूध गिर रहा था वहां डंडे से प्रहार कर दिया. जैसे ही उसने डंडा मारा कुछ टूटने की आवाज आई और कनकी (चावल के टुकड़े) के दाने वहां बिखर गए. उस जगह की सफाई करने पर वहां एक टूटा हुआ शिवलिंग मिला. बाद में इसी स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाया गया.’ उन्होंने बताया कि शिवलिंग के पास कनकी के दा...

माँ सर्वमंगला देवी मंदिर संपूर्ण दर्शन |ड्रोन वीडियो| Maa Sarvamangala Mandir Korba By Harsh Verma

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 माँ सर्वमंगला देवी मंदिर  कोरबा जिले के प्रसिद्ध मंदिर में से एक है। इस मंदिर की देवी दुर्गा है। यह मंदिर कोरेश के जमींदार में से एक राजेश्वर दयाल के पूर्वजों द्वारा बनाया गया था। मंदिर त्रिलोकिननाथ मंदिर, काली मंदिर और ज्योति कलाश भवन से घिरा हुआ है। वहाँ भी एक गुफा है, जो नदी के नीचे जाता है और दूसरी तरफ निकलता है। रानी धनराज कुंवर देवी को मंदिर में अपनी दैनिक यात्रा के लिए इस गुफा के लिए इस्तेमाल किया गया था। सर्वमंगला मंदिर का इतिहास वैसे तो 122  साल पुराना है। जिसकी स्थापना सन् 1898 के आस पास मानी जाती है। लेकिन इससे भी सालों पुरानी यहां एक और चीज है। वो है सूर्य देव के मनमोहक प्रतिमा के समीप स्थित वट वृक्ष, मंदिर के पुजारी अनिल पाण्डेय की मानें तो यह वट वृक्ष लगभग 500 वर्ष पुराना है। जैसा कि उनके पूर्वजों ने उन्हें बताया है। इस वृक्ष की सबसे बड़ी खासियत है कि इसे मानोकामना पूरा करने वाला वृक्ष माना जाता है। पूर्व में इस वृक्ष के नीचे हाथी भी आकर विश्राम किया करते थे। इसके बाद पिछले कुछ वर्षों तक विशाल वट वृक्ष के झूले जैसे तनों पर मयूर भी आकर विश्राम व क्रीडा करते ...

माँ मड़वारानी मंदिर, कोरबा Maa Madwarani Mandir Korba Chhattisgarh By Harsh Verma Chhattisgarh Rider

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  माँ मड़वारानी मंदिर, कोरबा से 18 कि.मी. एवं चांपा से 16 कि.मी. की दूरी पर कोरबा-चांपा हाइवे पर स्थित है |माँ मड़वारानी मंदिर, छत्तीसगढ ऱाज्य के कोरबा जिले में स्थित प्रसिद्ध मंदिर है एवं यहाँ के मूल निवासियों के द्वारा माँ मड़वारानी की आराधना की जाती है और उनके श्रद्धा एवं आस्था का प्रतीक हैं और यह माना जाता है की माँ मड़वारानी स्वयं प्रकट होकर आस-पास के गावों की रक्षा करती हैं | माँ मड़वारानी मंदिर, मड़वारानी पहाड़ की चोटी पर कलमी पेड़ के नीचे स्थित है | माँ मड़वारानी मुख्य मंदिर, मड़वारानी पहाड़ के सबसे ऊँची चोटी पर गहरी खाई के समीप कलमी पेड़ के नीचे स्थित है | ऐसा कहा जाता है की एक कलमी वृक्ष के कट जाने के बाद माँ मड़वारानी अपने चार बहनों के साथ वहाँ आई और अपनी शक्ति को वहाँ रखे पाँच पत्थरों में समाहित कर दिया, जिन्हे आज पिंडी रूप में पूजा जाता है |  माँ मड़वारानी की कहानी माँ मड़वारानी की कहानी की ऐतिहासिक है और ऐसा बुजुर्गों द्वारा आँखों देखी मानी जाती है | ऐसा माना जाता है क़ि माँ मड़वारानी अपने शादी के मंडप (मड़वा) को छोड़ कर आ गयी थी | इसी दौरान बरपाली-मड़वारानी रोड ...

हमर छत्तीसगढ़िया संस्कृति प्रकृति के सम्मान अउ मनखे मन के एकरूपता के भावना म सनाय हे। एखरे एक तिहार भोजली हरय।सगवारी बनाये के तिहार हरे भोजली तिहार तिहार के एक ठन अउ रूप हे "मितानी याने मित्रता"।के दिन एक दूसर ल भोजली के पौधा दे के भोजली बदथे अउ जीवन भर दोस्ती निभाय के किरिया खाथे। मितान अउ मितानिन के तिहार हरे (छत्तीसगढ़ी फ्रेंडशिप के दिन ) भोजली ला मितान मितानिन बनाये बर एक दूसर के कान माँ भोजली के जो पेड़ रहिथे ओला खोंचथे अउ मितान मितानिन (मित्रता ) बन जाथे भोजली के मतलब होथे "भुंइया म जल हो" (भूमि में जल हो).एखर बर हमर छत्तीसगढ़िया बहिनी मन भोजली दाई (प्रकृति) के पूजा करथे। भोजली गेहूं के पौधा होथे जेला सावन के अंजोरी पाख के नवमी म बोथे अउ राखी के बिहान दिन भादो के पहिली दिन म विसर्जन करथे। बहिनी मन बढ़िया पानी गिरे के अउ बने फसल होय कइके भोजली कराथे।एला बहुत से गांव में आज बहुत बड़े तिहार के रूप में मनाये बर चालू कर दे हवे छत्तीसगढ़ राइडर कोती ले जम्मो छत्तिसगरिया मन ला भोजली तिहार के कोरी-कोरी शुभकामना।जय जोहर जय छत्तीसगढ़ जय भोजलि महतारी #Bhojalitihar #भोजलिमहतारी #भोजलीतिहार #bhojali #bhojalifestival #chhattisgarhfestivals #festivalschhattisgarh #cgrider #chhattisgarhrider#Chhattisgarh #Chhattisgarhiya #Chhattisgarhi #morbhuiyan_chhattisgarh #CGFestival #ChhattisgarhFestival #BhojaliTihar #mitan #mitanin #mitani #bhojalimata #bhojalimahtari

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कुलेश्वर नाथ (राजिम) चम्पेश्वर नाथ (चम्पारण्य) ब्राह्मकेश्वर (ब्रह्मणी), पाणेश्वर नाथ (किंफगेश्वर) कोपेश्वर नाथ ( कोपरा) Kuleshwar Mahadev Rajim , Champeshwar Nath Champaranya , Barmhakeshwar nath Bamhani , Paneshwar Nath Fingeshwar , Kopeshwar Nath Kopra Panch Koshi Temple राजिम - छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक केन्द्र प्राचीनकाल से राजिम छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक केन्द्र रहा है। इतिहासकारों, कलानुरागियों और पुरातत्वविदों के लिए राजिम एक आकर्षण का केन्द्र है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से राजिम 45 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा गया है। राजिम में पैरी, सोंढूर और महानदी का ""त्रिवेणी संगम'' है। राजिम में राजीवलोचन और कुलेश्वरनाथ का मंदिर बहुत विख्यात है। राजीवलोचन मंदिर राजिम के सभी मंदिरों में सबसे पुराना है। यह स्थान शिव और वैष्णव धर्म का संगम तीर्थ है। राजिम के बारे में बहुत सी किंवदंतियां प्रचलित हैं। यहां पंचकोसी यात्रा की जाती है जिसके बारे में कहानी इस प्रकार है - एक बार विष्णु ने विश्वकर्मा से कहा कि धरती पर वे एक ऐसी जगह उनके मंदिर का निर्माण करेंे, जहां पांच कोस के अन्दर शव न जला हो। अब विश्वकर्मा जी धरती पर आए, और ढूंढ़ते रहे, पर ऐसा कोई स्थान उन्हें दिखाई नहीं दिया। उन्होंने वापस जाकर जब विष्णु जी से कहा तब विष्णु जी एक कमल के फूल को धरती पर छोड़कर विश्वकर्मा जी से कहा कि ""यह जहां गिरेगा, वहीं हमारे मंदिर का निर्माण होगा''। इस प्रकार कमल फूल के पराग पर विष्णु भगवान का मन्दिर है और पंखुड़ियों पर पंचकोसी धाम बसा हुआ है। कुलेश्वर नाथ (राजिम) चम्पेश्वर नाथ (चम्पारण्य) ब्राह्मकेश्वर (ब्रह्मणी), पाणेश्वर नाथ (किंफगेश्वर) कोपेश्वर नाथ ( कोपरा)। यात्रा के दिन यात्री पहले राजीव लोचन के मंदिर में जाकर देव विग्रह की पूजा अर्चना करते हैं, इसके बाद पंचकोसी यात्रा करने के बाद फिर राजीव लोचन के मंदिर में जाते हैं। पूजा करने के बाद आटका का प्रसाद और चावल, कपड़े एवं पैसे अपृत करते हैं। आटका है चावल से बने पीड़िया नाम की मिठाई। यह छत्तीसगढ़ की मुख्य उपज धान का प्रतीक स्वरुप नैवेद्य है। राजीव लोचन के मंदिर में पूजा करने के बाद यात्री जाते हैं संगम पर स्थित उत्पलेश्वर शिव (कुलेश्वर नाथ) मंदिर में। वहां दर्शन पूजा करके पटेश्वर महादेव के दर्शन करने पटेवा गांव जाते हैं। यात्रा का यह प्रथम पड़ाव है। पटेवा का प्राचीन नाम है पट्टनापुरी। पटेवा राजिम से 5 कि.मी. दूर है। पटेश्वर महादेव ""सद्योजात'' नाम वाली भगवान शम्भु की मूर्ति कहें जातें हैं। इनकी अद्धार्ंगिनी हैं भगवती अन्नपूर्णा, हम कह सकते हैं कि ये अन्नमयकोश की प्रतीक हैं। वहां पूजा करते समय जो मन्त्र उच्चारण करते हैं, उसमें अन्न की महिमा का वर्णन किया गया है। उस मन्त्र में कहते हैं कि अन्न ही ब्रह्म है, इस प्रकार पटेश्वर महादेव ""अन्नब्रह्म'' के रुप में पूजे जाते हैं। यात्री यहां पहुंचकर रात में विश्राम करते हैं और सुबह शिवजी के तालाब में नहाकर पूजा अर्चना करके चल पड़ते हैं, अगले पड़ाव की ओर। चम्पकेश्वर महादेव - चम्पकेश्वर महादेव का स्वयं-भू लिंग यहां जब प्रतिष्ठित हुआ तब शिव भगवान को ही पूजते थे यहां, बाद में वल्लभाचार्य के कारण यह एक वैष्णव पीठ के रुप में भी प्रतिष्ठित हुआ। शैव एवं वैष्णव सम्प्रदायों के संगम स्थल के रुप में एकता का प्रतीक बन गया। इसके बाद यात्री जाते हैं ब्राह्मनी नाम के गांव में जहां ब्रह्मकेश्वर महादेव की पूजा अपंण करते हैं। ब्रह्मकेश्वर महादेव - चम्पारण से 9 कि.मी. दूरी पर उत्तर पूर्व की ओर ब्रह्मनी नाम का एक गांव है जो ब्रह्मनी नदी या बधनई नदी के किनारे अवस्थित है। ब्रह्मकेश्वर महादेव में शम्भू की ""अधोर'' वाली मूर्ति है। उमा देवी इनकी शक्ति हैं। अधोर महादेव या ब्रह्मकेश्वर महादेव, ब्रह्म के आनन्दमय स्वरुप में पूजे जाते हैं। ऐसा विश्वास करते हैं लोग कि इस अभिनन्दमय स्वरुप को जो एकबार पहचान लेते हैं, वे कभी भी भयभीत नहीं होते। बधनई नदी के किनारे एक कुंड है जिसके उत्तरी छोरपर ब्रह्मकेश्वर महादेव का मन्दिर है। इस कुंड में जल का स्रोत है जिसे श्वेत या सेत गंगा के नाम से जानते हैं लोग। ब्रह्मकेश्वर महादेव की पूजा करने के बाद यात्री चल पड़ते हैं किंफगेश्वर नगर की ओर। राजिम से 16 कि.मी. (पूर्व दिशा) की दूरी पर है यह किंफगेश्वर नगर। यहां स्थित है फणिकेश्वर महादेव का मंदिर, फणिकेश्वर महादेव में है शम्भू की ""ईशान'' नाम वाली मूर्ति। इनकी अद्धार्ंगिनी हैं अंबिका। ऐसा कहते हैं कि फणिकेश्वर महादेव प्रतीक है ""विज्ञानमय कोश'' के और वे भक्तों को शुभगति देते हैं। यहां से यात्री चल पड़ते हैं कोपरा गाँव की ओर। राजिम से १६ कि.मी. की दूरी पर यह गांव है। यहां है कर्पूरेश्वर महादेव का मंदिर। कुछ लोग उन्हें कोपेश्वर नाथ नाम से जानते हैं। ये जगह है पंचकोसी यात्रा का आखरी पड़ाव। कोपरा गांव के पश्चिम में ""दलदली'' तालाब है, उसी तालाब के भीतर, गहरे पानी में यह मंदिर हैं। इस तालाब को शंख सरोवर भी कहा जाता है। watch fully video - https://youtu.be/vqLL5wsbvW4 Facebook :- https://www.facebook.com/Chhattisgarr... Twitter : - https://twitter.com/Chhattisgarridr Instagram :- https://www.instagram.com/chhattisgar... My Blog : - https://chhattisgarhrider.blogspot.com/ #panchkoshimandir #पंचकोशीधाम

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कुलेश्वर नाथ (राजिम) चम्पेश्वर नाथ (चम्पारण्य) ब्राह्मकेश्वर (ब्रह्मणी), पाणेश्वर नाथ (किंफगेश्वर) कोपेश्वर नाथ ( कोपरा) Kuleshwar Mahadev Rajim , Champeshwar Nath Champaranya , Barmhakeshwar nath Bamhani , Paneshwar Nath Fingeshwar , Kopeshwar Nath Kopra Panch Koshi Temple राजिम - छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक केन्द्र प्राचीनकाल से राजिम छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक केन्द्र रहा है। इतिहासकारों, कलानुरागियों और पुरातत्वविदों के लिए राजिम एक आकर्षण का केन्द्र है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से राजिम 45 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा गया है। राजिम में पैरी, सोंढूर और महानदी का ""त्रिवेणी संगम'' है। राजिम में राजीवलोचन और कुलेश्वरनाथ का मंदिर बहुत विख्यात है। राजीवलोचन मंदिर राजिम के सभी मंदिरों में सबसे पुराना है। यह स्थान शिव और वैष्णव धर्म का संगम तीर्थ है। राजिम के बारे में बहुत सी किंवदंतियां प्रचलित हैं। यहां पंचकोसी यात्रा की जाती है जिसके बारे में कहानी इस प्रकार है - एक बार विष्णु ने विश्वकर्मा से कहा कि धरती पर वे एक ऐसी जगह...